संगम नगरी प्रयागराज में माघ मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच हुए टकराव ने धार्मिक जगत को हिला दिया। उज्जैन के स्वामी जितेंद्र सरस्वती और काशी के महामंडलेश्वर ज्ञान दास ने इसकी निंदा की है, हिंदू समाज की एकता पर असर की आशंका जताई।
ज्ञान दास महाराज ने घटना को चिंताजनक बताया। पुलिस द्वारा युवा भक्तों के साथ किए गए बर्ताव को गलत ठहराते हुए कहा कि इससे समाज बंट सकता है। जिम्मेदारों को सजा देकर इस विवाद को समाप्त किया जाए।
स्वामी जितेंद्र सरस्वती ने अतीत के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि बैटुकों ने पहले भी पुलिस पर हमला किया। सुरक्षा हेतु बैरिकेड जरूरी हैं, रथ 2 किमी दूर पार्क होते हैं। मात्र 50 मीटर चलने से गुरेज क्यों? गंगा मां तो पुत्र को नंगे देखती हैं, फिर यह घमंड? उन्होंने शंकराचार्य के दावे को खारिज किया, कहा स्वरूपानंद जी के बाद कोई संन्यासी नहीं था। अदालत ने बैनर प्रतिबंधित किए। कांग्रेस-सपा के लोग सक्रिय दिखे, यह राजनीतिक साजिश है। धर्माचार्यों को सावधान रहना होगा।