थलपति विजय अभिनीत ‘लियो’ का सेंसर विवाद चरम पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने से फिल्म की रिलीज अनिश्चित हो गई है, जिससे फैंस में रोष फैल गया है।
इस हाई-वोल्टेज एक्शन फिल्म में विजय का अवतार चर्चा का केंद्र है। सीबीएफसी ने ‘ए’ रेटिंग के साथ हिंसा वाले सीन काटने के आदेश दिए, जबकि तमिलनाडु सेंसर ने और सख्ती बरती। प्रोड्यूसर्स ने इसे रचनात्मकता पर हमला बताते हुए न्याय की गुहार लगाई।
मद्रास हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। याचिका में कहा गया कि बिना ठोस आधार के कट्स फिल्म की आत्मा को नुकसान पहुंचाते हैं। उद्योग विशेषज्ञ इसे सेंसरशिप की मनमानी बता रहे हैं।
‘लियो’ दीवाली का सबसे बड़ा दांव था, जिसमें संजय दत्त, त्रिशा जैसे सितारे हैं। बुकिंग्स रुकने से आर्थिक नुकसान भारी है। सोशल मीडिया पर फैंस आंदोलनरत हैं, सेंसर बोर्ड की आलोचना कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल ‘लियो’ बल्कि पूरे सिनेमा जगत के लिए मिसाल बनेगा। क्या न्यायालय स्वतंत्र अभिव्यक्ति को प्राथमिकता देगा या सेंसरशिप को मजबूत करेगा? आने वाले दिनों में सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं।