फिल्म निर्देशक सेल्वाराघवन ने जीवन का ऐसा कड़वा पहलू उजागर किया, जो सुनकर हर कोई सोच में पड़ गया। ‘दूसरों की परेशानियों से किसी को फर्क नहीं पड़ता,’ उनका स्पष्ट बयान मानवीय उदासीनता को आईना दिखाता है।
प्रमोशनल इवेंट के दौरान उन्होंने इस सत्य पर विस्तार से बात की। फिल्मी दुनिया के कठोर अनुभवों से सीखा यह सबक है कि सफलता में सब साथ देते हैं, लेकिन असफलता में अकेलापन ही होता है। ‘जीत पर तालियां, हार पर खामोशी,’ उन्होंने कहा।
पोस्ट-कोविड दौर में अकेलापन बढ़ा है, और सेल्वाराघवन की यह पहचान सटीक है। उन्होंने निजी कहानियां सुनाईं, जब परिवारिक संकट में करीबी लोगों ने मुंह फेर लिया।
सलाह देते हुए बोले, ‘अपनी ऊर्जा बचाओ, हर किसी को अपनी पीड़ा न सुनाओ।’ ऑनलाइन बहस छिड़ गई है, जहां प्रशंसक उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं। यह बयान न केवल फिल्म जगत, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। सच्चे रिश्तों की तलाश अब जरूरी हो गई है।