विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर देखें हिंदी उपन्यासों का सिनेमाई रूपांतरण, जो कालजयी फिल्में बन गईं।
बॉलीवुड की नींव में हिंदी साहित्य का बड़ा हाथ है। ‘देवदास’ की कहानी शरतचंद्र की कलम से निकली और परदे पर चार बार चमकी। हर फिल्म ने प्रेमी के संहार को अलग अंदाज में दिखाया।
‘मदर इंडिया’ ने ‘मृगनयनी’ को ग्रामीण भारत की सच्चाई दी। नरगिस की भूमिका ने मांत्व को नया आयाम दिया, जो ऑस्कर तक पहुंची।
‘गाइड’ में देव आनंद ने नारायण के पात्र को जीया। एस.डी. बर्मन का संगीत और विजय आनंद की निर्देशक क्षमता ने इसे क्लासिक बनाया।
रुस्वा का ‘उमराव जान’ रेखा के कंधों पर सवार होकर लखनऊ की गलियों में घूमा। इसकी कविताएं आज भी गुनगुनाई जाती हैं।
समकालीन फिल्में जैसे ‘परीणिता’ भी साहित्य से प्रेरित हैं। यह दिवस हमें साहित्य और सिनेमा के अटूट बंधन की याद दिलाता है।