नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह जैसे महान कलाकारों का बेटा होने के बावजूद विवान शाह ने स्टारडम की चाहत में करियर दांव पर लगा दिया। युवावस्था में आई सफलताओं ने उन्हें अंधा बना दिया। वे चाहते थे कि रातोंरात हीरो बन जाएं, लेकिन लालच ने सब तबाह कर दिया।
फिल्मों जैसे ‘लूटकेस’ और ‘7 खून माफ’ ने शुरुआती धमाल मचाया। लेकिन विवान ने सितारा बनने की जल्दबाजी में स्क्रिप्ट्स ठुकराईं, प्रोड्यूसर्स से टकराए। ‘मेरा रोल बड़ा होना चाहिए’—ऐसी जिद ने दरवाजे बंद करा दिए। 2018 तक हालत ये हो गई कि कोई प्रोजेक्ट नहीं मिला। परिवार ने देखा तो हस्तक्षेप किया।
नसीरुद्दीन ने अपनी जिंदगी के संघर्ष सुनाए, कहा कि ‘सफलता मेहनत से कमाई जाती है।’ रत्ना ने प्यार से समझाया कि परिवार की विरासत को सम्मान दो। विवान थिएटर में उतरे, ‘द गुड डॉक्टर’ जैसे नाटकों से सीखा। धीरे-धीरे फिल्मों में वापसी हुई—’मेड इन हेवन’, ‘रेतलॉर्ड’ में जान फूंकी।
अब 33 साल के विवान परिपक्व कलाकार हैं। उनकी कहानी नई पीढ़ी को चेतावनी है: स्टार बनना सपना है, लेकिन लालच जहर। माता-पिता की बुद्धिमत्ता ने विवान को नई जिंदगी दी, जो बॉलीवुड के लिए प्रेरणा है।