कल्कि कोचलिन का नाम लेते ही याद आती है एक ऐसी अभिनेत्री जो कभी समझौता नहीं करती। चंद्रमुखी से सिंगल मां बनने तक, उनका जीवन एक फिल्म से कम नहीं।
‘देव.डी’ ने उन्हें चंद्रमुखी बनाया, जो नायिका नहीं, बल्कि जीवंत चरित्र था। इस भूमिका ने न सिर्फ पुरस्कार दिलाए, बल्कि कल्कि को इंडिपेंडेंट सिनेमा की रानी बना दिया। ‘दैट गर्ल इन येलो बूट्स’ और ‘ट्रैप्ड’ जैसी फिल्मों ने उनकी प्रतिभा को निखारा।
अनुराग कश्यप से तलाक के बाद जीवन नया मोड़ ले चुका था। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी। 2019 में बेटी साफो के जन्म ने उन्हें नई ऊर्जा दी। ‘मां बनना मेरी पसंद थी, बिना किसी बंधन के,’ उनका स्पष्ट संदेश था।
करियर में वे कभी पीछे नहीं हटीं। वेब सीरीज से लेकर थिएटर तक, हर जगह छाप छोड़ी। उनकी कविता पुस्तक ‘इवरीवन हैज अ ब्यूटीफुल मैड स्टोरी’ ने उनके कलात्मक पक्ष को उजागर किया।
पर्यावरण, नारीवाद और मेंटल हेल्थ पर उनकी सक्रियता काबिले-तारीफ है। गोवा में बेटी संग शांत जीवन जीते हुए भी वे मुंबई की चकाचौंध में सक्रिय रहती हैं।
कल्कि कोचलिन जैसी महिलाएं साबित करती हैं कि सपने शादी या समाज से बंधे नहीं होते। वे अपनी मिसाल खुद हैं।