सोशल एक्टिविस्ट खुशबू पाटनी ने अंकिता हत्याकांड को आधार बनाकर महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण पर अहम बात कही। एक साक्षात्कार में उन्होंने इस घटना के जरिए समाज की पोल खोली और बताया कि असली नारी सशक्तीकरण क्या है।
अंकिता की करीब व्यक्ति द्वारा निर्मम हत्या ने घरेलू हिंसा की भयावहता दिखाई। पाटनी ने साफ कहा कि सशक्तीकरण के बिना सुरक्षा अधूरी है। जांच में देरी और सजा में ढिलाई पर उन्होंने कड़ी आलोचना की।
समाज में पितृसत्ता, कमजोर कानून प्रवर्तन और सतही योजनाओं की पोल खोलते हुए पाटनी ने तकनीकी समाधान सुझाए, जैसे मोबाइल पर पैनिक बटन, सुरक्षित क्षेत्रों की निगरानी। उन्होंने स्वरक्षा प्रशिक्षण, पुरुषों की संवेदनशीलता पर जोर दिया।
कार्यस्थलों पर जीरो टॉलरेंस और सांस्कृतिक बदलाव की वकालत की। उनके विचारों ने #सच्चा सशक्तीकरण ट्रेंड कराया। अंकिता कांड के बाद पाटनी की आवाज सुधारों को गति दे रही है, जो महिलाओं के लिए नया दौर ला सकती है।