बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता रणदीप हुड्डा ने एक पैनल चर्चा में सिनेमा की जिम्मेदारी पर रोशनी डाली। ‘लोगों को संस्कृति और मूल्यों से बांधने वाली फिल्में ही सिनेमा की सही जीत हैं,’ उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा।
अपने 20 वर्षों के सफर में हुड्डा ने सांस्कृतिक गहराई वाली भूमिकाओं का जिक्र किया। ऐतिहासिक और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों से उन्होंने पहचान बनाई। ‘वर्तमान में बेमानी व्यावसायिक फिल्मों के दौर में जड़ों से जुड़ाव जरूरी है।’
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को विविध सामग्री के लिए बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि बजट की बाधाएं अब कम हैं। भविष्य के कलाकारों को लोककथाओं से प्रेरणा लेने की सलाह दी।
हुड्डा ने सेंसरशिप और बाजार दबावों पर चिंता जताई, लेकिन आशावादी रहे। क्लासिक फिल्में पीढ़ियों को प्रभावित करती रहती हैं। ‘सांस्कृतिक प्रभाव स्थायी होता है।’
महामारी के बाद चुनौतियों के बीच उनका संदेश प्रासंगिक है। आगामी प्रोजेक्ट्स से वे इस विचार को मजबूत करेंगे। सिनेमा समाज को एकजुट करने का शक्तिशाली माध्यम बने।