प्रख्यात नेता राजेंद्र चावला ने घोषणा की कि वे अपनी बेटियों व परिवार की खातिर जान की परवाह नहीं करेंगे। यह बयान उस समय आया जब राजनीतिक दुश्मनी ने उनके घर की चौखट लांघ ली।
मीडिया से बातचीत में चावला ने हिंदी में कहा, ‘मैं अपनी बेटियों और परिवार के लिए जान की भी बाजी लगा सकता हूं।’ उनके शब्दों में दर्द और दृढ़ता दोनों झलक रहे थे। समर्थक इस बयान से उत्साहित नजर आ रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों से चावला परिवार पर व्यक्तिगत हमले हो रहे थे। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक सभाओं तक आरोपों का दौर चला। चावला ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया और जवाब में परिवारभक्ति का परचम लहराया।
उनका करियर कई उतार-चढ़ावों से गुजरा है। लेकिन हर कदम पर उन्होंने अपनों का साथ निभाया। अब यह बयान उनकी लोकप्रियता को नई उंचाई दे सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी साल में पारिवारिक मुद्दे वोट बैंक जुटाने में कारगर साबित होते हैं। चावला का यह रुख विपक्ष को कटघरे में ला खड़ा कर रहा है।
अंततः, चावला का यह संदेश समाज को पारिवारिक मूल्यों की याद दिलाता है। राजनीति के मैदान में भी इंसानियत जिंदा है, यह साबित हो गया। आगे की जंग में वे और मजबूत दिख रहे हैं।