‘रामायण’ सिर्फ एक धारावाहिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक क्रांति थी। इसके हर किरदार ने दर्शकों के दिलों पर राज किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लक्ष्मण का रोल पाने की होड़ में सुनील लहरी को किस्मत ने दूसरा रास्ता दिखाया? जी हां, वे बने सुमित्रा नंदन – एक ऐसा किरदार जिसने उन्हें घर-घर पहचान दी।
रामानंद सागर के प्रोडक्शन हाउस में ऑडिशन के दिन सुनील लहरी पूरे जोश में थे। फिल्मों से अनुभवी अभिनेता के तौर पर उन्होंने लक्ष्मण के हर पहलू को उकेरा – निडर योद्धा, भक्त भाई, पत्नी से विरह सहने वाला। सबने तारीफ की, लेकिन सागर साहब ने कहा, ‘तुम लक्ष्मण नहीं हो।’
फिर आया टर्निंग पॉइंट। सुमित्रा नंदन – रानी सुमित्रा के पुत्र, लक्ष्मण के छोटे भाई। यह भूमिका अयोध्या के राजपरिवार को पूरा करती थी। लहरी ने इसमें जान फूंक दी। उनकी मुस्कान, संवाद अदायगी ने छोटे-छोटे सीन को यादगार बना दिया।
1987 में जब ‘रामायण’ शुरू हुई, टीआरपी के सारे रिकॉर्ड टूट गए। 100 मिलियन से ज्यादा दर्शक हर एपिसोड के लिए बेताब रहते। लहरी को रातोंरात स्टारडम मिला। भोजपुरी सिनेमा हो या टीवी शोज, हर दरवाजा खुला। कोरोना काल में री-टेलीकास्ट ने फिर से याद दिलाया उनके जलवे।
सुनील लहरी की यह यात्रा सिखाती है कि शो बिजनेस में प्लान बी कभी-कभी प्लान ए से बेहतर होता है। आज 60 पार उम्र में भी वे फैन मीट्स में धूम मचाते हैं। ‘रामायण’ की यह कास्टिंग स्टोरी हमेशा प्रेरित करेगी।