हिंदी सिनेमा की उन चंद नायिकाओं में से एक जिन्होंने अपनी मेहनत से इतिहास रचा, वह हैं नंदा। ‘बॉलीवुड की छोटी बहन’ कहलाने वाली नंदा ने छोटी भूमिकाओं से शुरू कर लीड रोल्स तक का सफर तय किया।
13 साल की उम्र में ‘मंडी’ से डेब्यू, फिर ‘श्री 420’, ‘अनाड़ी’ में चमकीं। शशि कपूर के साथ ‘ज्वेल थीफ’, सुनिल दत्त संग ‘कालापानी’ ने लोकप्रियता दी। उनकी आंखों की अदायगी और नैचुरल एक्टिंग दिल जीत लेती।
वे रोमांस, ड्रामा, सस्पेंस सब में फिट बैठतीं। ‘गुमनाम’, ‘लव इन टोक्यो’ जैसी फिल्में सुपरहिट रहीं। पारिवारिक जीवन में उनकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही।
70 के दशक में शादी के बाद संन्यास जैसा लिया, लेकिन ‘प्रेम रोग’ में वापसी की। नंदा की कहानी प्रेरणा है कि टैलेंट और परिश्रम से कोई भी ऊंचाइयों को छू सकता है।