तमिल सिनेमा सुपरस्टार विजय अभिनीत ‘जन नायकन’ फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेट में अनावश्यक देरी को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड पर सख्ती दिखाई है। जस्टिस अनीता सुमंथ ने सुनवाई के दौरान बोर्ड से शिकायतों से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं।
5 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले सीबीएफसी को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। फिल्म निर्माताओं ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक कारणों से सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डाली जा रही है। चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय ने 10 नवंबर को फिल्म की जांच की थी।
फिल्म निर्माण इकाई लाइका प्रोडक्शंस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि सभी जरूरी संशोधन कर दिए गए हैं, फिर भी सर्टिफिकेट जारी नहीं हो रहा। सूत्रों के मुताबिक कुछ राजनीतिक संगठनों ने संवादों और दृश्यों पर आपत्ति दर्ज कराई है।
विजय का यह प्रोजेक्ट उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत से ठीक पहले रिलीज होनेवाला है। डायरेक्टर एच. विनोथ की यह फिल्म भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर आधारित है। विजय मुख्य भूमिका में हैं जबकि पूजा हेगड़े, बॉबी देओल जैसे सितारे सहकलाकार हैं।
पोंगल 2025 रिलीज को लक्ष्य बनाकर बनाई गई इस महंगी फिल्म का बजट 300 करोड़ के पार है। इसमें हॉलीवुड स्तर के विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया है। सेंसर में देरी से वितरण, विज्ञापनों और अन्य खर्चों में भारी नुकसान हो रहा है।
फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों ने हाईकोर्ट के हस्तक्षेप का समर्थन किया है। उनका मानना है कि सेंट्रल बोर्ड को बिना प्रमाण के शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। सेंसर प्रक्रिया में समयबद्धता और पारदर्शिता जरूरी है।
विजय के प्रशंसक संगठन सक्रिय हो गए हैं। वे सोशल मीडिया के जरिए लगातार दबाव बना रहे हैं। तमिलनाडु में सिनेमा और राजनीति का गहरा नाता रहा है। ऐसे में सितारों की फिल्मों को राजनीतिक निशाने पर लेना आम बात हो गई है।
कोर्ट के इस फैसले से सेंसर बोर्ड पर दबाव बढ़ेगा। उम्मीद है कि जल्द ही फिल्म को हरी झंडी मिल जाएगी और दर्शक इसे बड़े पर्दे पर देख सकेंगे। तमिल सिनेमा के इस धमाकेदार प्रोजेक्ट को लेकर व्यापक उत्साह बना हुआ है।