मार्च 2026 की डेडलाइन सांसों पर सवार है और सुरक्षाबल नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रतिबंधित संगठन की केंद्रीय समिति के चार शीर्ष नेता समेत करीब 300 नक्सली अब रडार पर हैं।
मिसिर बेसरा (भास्कर), देवजी (कुंभा दादा/चेतन), राममन्ना (गणपति/लक्ष्मण राव) और मल्लाह राजा रेड्डी (सागर) इनका नाम लिया जा रहा है। छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर देवजी-केसा सोढ़ी की टिप्स पर मंगल को अभियान चला। रेड्डी ओडिशा में है, अन्य सक्रिय।
सुरक्षाकर्मी चेतावनी दे रहे हैं—समर्पण या मौत। यह अभियान नक्सल खत्म करने के सरकारी वादे को पूरा करेंगे। गृह मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक सबसे प्रभावित जिले तीन रह गए—बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर।
कुल प्रभावित जिले 18 से 11 पर सिमट गए। मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक समस्या उखाड़ फेंकेगी। आधुनिक हथियार, खुफिया तंत्र और स्थानीय सहयोग से नक्सली कमजोर पड़ रहे हैं।
आत्मसमर्पण बढ़े हैं, हथियार जब्त हो रहे हैं। इन बड़े कमांडरों को पकड़ना या मार गिराना नक्सल नेटवर्क को चूर करने जैसा होगा। ग्रामीण भारत के इन इलाकों में अब विकास और शांति की नई सुबह दिख रही है।