गरियाबंद के राजिम में कुंभ कल्प मेला दो दिन बाद प्रारंभ होगा, जो 15 फरवरी तक चलेगा। छत्तीसगढ़ का यह प्रमुख धार्मिक मेला हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। दुर्भाग्य से स्थल पर कार्य धीमे, असुरक्षित और अपूर्ण हैं।
राजेश अग्रवाल मंत्री के निरीक्षण ने पोल खोल दी। मैदान में बेतरतीब निर्माण, सुरक्षा हेलमेट के बिना मजदूरी, अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सफाई की कमी ने सबको चौंका दिया। उन्होंने इवेंट मैनेजरों व अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। मजदूर दुर्घटना की ताजा घटना इसे और गंभीर बनाती है।
तीन वर्षों से टेंडर सिस्टम से सभी कार्य एजेंसी को दिए जा रहे हैं—सजावट से लेकर सुरक्षा तक। विशाल आयोजन के लिए यह जरूरी था, लेकिन जल्दबाजी ने कमियां पैदा की हैं। अब सुधार की मांग तेज हो गई है।
लोगों का गुस्सा मदिरा नीति पर है। राजिम जैसे पवित्र स्थान पर मांस-शराब बंद होनी चाहिए, लेकिन आदेश जारी नहीं हुआ। दुकानदार परेशान हैं और श्रद्धालु स्पष्टता चाहते हैं।
बोर्डों पर ‘राजिम माघी पुन्नी मेला’ का नाम बरकरार है। नाम परिवर्तन के बावजूद बदलाव नहीं हुआ। भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई के बीच प्रशासन की सुस्ती सवाल खड़ी कर रही है।
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए तत्परता जरूरी है। व्यवस्थाएं दुरुस्त हों, तो मेला सफल होगा। अन्यथा बदनामी होगी।