छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल को विशेष सीबीआई कोर्ट से करारा झटका लगा। अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को पलट दिया, जो 2017 के राजेश मुनत अश्लील वीडियो कांड से जुड़ा था। कोर्ट ने अन्य आरोपी कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा व विजय भाटिया की चार्ज फ्रेमिंग के खिलाफ अपीलें भी ठुकरा दीं।
केस की जड़ें 2017 में हैं, जब मुनत व प्रकाश बजाज की शिकायतों पर दो एफआईआर दर्ज हुईं। आरोप था कि फर्जी वीडियो बनाकर मुनत की पोल खोली जा रही थी, साथ ही ब्लैकमेल की कोशिश हुई। बीजेपी सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपी, जिसने चार्जशीट के साथ बघेल समेत कई नामजद किए।
विनोद वर्मा की गिरफ्तारी के दौरान विवाद चरम पर पहुंचा। उन्होंने इसे फंसाने की साजिश बताया। मुनत ने वीडियो को मनगढ़ंत कहा। शनिवार का फैसला ट्रायल को हरी झंडी देता है।
बघेल ने हमेशा आरोपों का खंडन किया है, लेकिन अब कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। यह राजनीतिक दलों के बीच जंग को नई आग दे सकता है। राज्य में सियासत अब इस केस पर केंद्रित हो गई है।
कुल मिलाकर, यह मामला सत्ता के गलियारों में चली साजिशों का आईना है, जो लोकतंत्र की नींव को कमजोर करती हैं। आगे की कार्यवाही पर सबकी नजरें हैं।