बस्तर के जंगलों में एक बार फिर बंदूकें गरज रही हैं, लेकिन इस बार लक्ष्य बहुत स्पष्ट है—नक्सल कमांडर पपाराव। छत्तीसगढ़ पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त रूप से अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में पपाराव की तलाश में एक बड़ा अभियान छेड़ा है। 25 लाख के इस इनामी नक्सली को माओवादी ढांचे का आखिरी बड़ा स्तंभ माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पपाराव अब पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है और उसका दस्ता छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट गया है। 55 वर्षीय पपाराव के पास AK-47 होने की खबर है, लेकिन उसके पास अब न तो पहले जैसा जनसमर्थन बचा है और न ही मजबूत कैडर। सुरक्षा बलों ने इंद्रावती-अबूझमाड़ बेल्ट की घेराबंदी कर दी है ताकि वह महाराष्ट्र की सीमा पार न कर सके।
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