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    Chhattisgarh

    GPF: वित्त सचिव के नए आदेश, जानिए क्या हैं नियम

    Indian SamacharBy Indian SamacharSeptember 16, 20254 Mins Read
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    रायपुर। वित्त विभाग के सचिव मुकेश बंसल ने GPF (सामान्य भविष्य निधि) खातों के प्रबंधन और रखरखाव के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नए दिशा-निर्देश GPF खातों के संचालन को सुव्यवस्थित करने और कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं को बेहतर ढंग से प्रदान करने के लिए जारी किए गए हैं। इस आदेश में, सभी सरकारी कार्यालयों के विभाग प्रमुखों को GPF से संबंधित फाइलों के निपटान के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों और किसी भी बकाया राशि की वसूली के लिए भी दिशानिर्देश शामिल हैं।

    सामान्य भविष्य निधि नियम 1955 के नियम 11(1)(ख) के अनुसार, कर्मचारियों को अपनी परिलब्धियों (वेतन, अवकाश वेतन, आदि) का कम से कम 12% GPF में जमा करना होता है। हालांकि, सरकार कर्मचारियों को उनकी परिलब्धियों से अधिक राशि जमा करने की अनुमति दे सकती है। परिलब्धियों की गणना में महंगाई भत्ते को शामिल नहीं किया जाता है।

    • GPF से मिलने वाली वित्तीय सहायता:
    • विवाह संबंधी खर्चों के लिए।
    • चिकित्सा खर्चों के लिए।
    • आवासीय भवन के निर्माण या मरम्मत के लिए।
    • उच्च शिक्षा, जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग या तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए।
    • आवासीय भूखंड या बने हुए मकान खरीदने के लिए।

    GPF खातों के रख-रखाव के लिए दिशानिर्देश:

    सरकारी कर्मचारियों के GPF खातों को विभागीय भविष्य निधि (DPF) खातों से अलग रखा जाएगा। DPF खातों का रिकॉर्ड कार्यालय प्रमुख द्वारा अलग से रखा जाएगा।

    प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में, कर्मचारियों को उनकी GPF खातों की जानकारी (ब्याज सहित) दी जाएगी। विभाग प्रमुखों को 30 अप्रैल तक एक समेकित सूची तैयार करके भेजनी होगी। मई के वेतन के साथ यह प्रमाण देना होगा कि पिछले वित्तीय वर्ष के ब्याज पत्रक भेजे जा चुके हैं। विभाग प्रमुख 31 मई तक महालेखाकार को यह सूची भेजेंगे और जून के वेतन के साथ प्रमाण प्रस्तुत करेंगे कि यह कार्य पूरा हो गया है।

    नामांकन अनिवार्य:

    सरकारी सेवा में शामिल होते ही कर्मचारियों को GPF के लिए नामांकन करना होगा। इसकी जिम्मेदारी कार्यालय प्रमुख की होगी। विवाह के बाद नामांकन में परिवर्तन तुरंत महालेखाकार को सूचित करना होगा। यदि वेतन रोका जाता है, तो GPF कटौती वेतन जारी होने पर की जाएगी।

    सेवानिवृत्ति से पहले:

    छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्य निधि नियम 10(1) के अनुसार, सेवानिवृत्ति से चार महीने पहले GPF में कटौती बंद कर दी जाएगी। यदि किसी कर्मचारी के एक से अधिक GPF खाते हैं, तो पहला खाता मान्य होगा, और अन्य खातों को रद्द कर दिया जाएगा।

    सेवानिवृत्ति के बाद:

    सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति के मामलों में, GPF खाता अंतिम भुगतान के बाद बंद कर दिया जाएगा और नया खाता खोला जाएगा। सेवानिवृत्ति से एक साल पहले पासबुक को अपडेट करना होगा। कर्मचारी सेवानिवृत्ति से पहले पासबुक में सभी प्रविष्टियाँ सत्यापित करवाएंगे।

    अंशदान की कटौती:

    सेवानिवृत्ति से चार महीने पहले अंशदान की कटौती बंद हो जाएगी। कर्मचारियों को अपने GPF खाते में पुरानी क्रेडिट (missing credits) की राशि जमा करानी होगी।

    अन्य महत्वपूर्ण बातें:

    जो कर्मचारी DPF से GPF में स्थानांतरित हुए हैं, उन्हें अपनी DPF राशि GPF में स्थानांतरित करनी होगी। सेवानिवृत्ति, मृत्यु या त्यागपत्र की स्थिति में, महालेखाकार को एक महीने के भीतर सूचित करना होगा। मृत्यु के मामले में, मृत्यु प्रमाण पत्र और वैध नामांकन आवश्यक हैं।

    ब्याज:

    ब्याज का भुगतान या तो उस महीने तक किया जाएगा जिसमें राशि का भुगतान किया जाता है या सेवानिवृत्ति के 6 महीने बाद तक, जो भी पहले हो। विशेष परिस्थितियों में, विलंब का कारण बताते हुए प्रशासनिक विभाग 6 महीने के बाद ब्याज स्वीकृत कर सकता है।

    सूची जमा करने का निर्देश:

    सभी विभाग प्रमुखों और कार्यालय प्रमुखों को हर साल 1 जुलाई को एक सूची तैयार करनी होगी, जिसमें अगले 12 महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के नाम, खाता संख्या और सेवानिवृत्ति की तारीख शामिल होगी। इसका उद्देश्य GPF खातों का उचित प्रबंधन करना, समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और नकारात्मक शेष राशि से बचना है।

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