मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर अब वैश्विक पटल पर अपनी छाप छोड़ रही है। 27 उत्पादों को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिलने से राज्य की विशिष्टताएं सुरक्षित हो गई हैं।
वाणिज्य मंत्रालय की रजिस्ट्री द्वारा दिए जाने वाले इस टैग से उत्पादों को उनकी मूल जगह से जोड़कर नकलों से बचाया जाता है। दार्जिलिंग चाय के बाद मध्य प्रदेश ने भी कई मोर्चों पर सफलता हासिल की है।
बैतूल की भरेवा कला को राष्ट्रीय मान्यता मिली, जहां कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त हुआ। छतरपुर के खजुराहो व काष्ठ शिल्प, ग्वालियर पत्थर व पेपर मशी ने भी झंडे गाड़े।
चंदेरी-महेश्वरी साड़ी, धार बाग प्रिंट, इंदौर लेदर टॉय, दतिया-टीकमगढ़ बेल मेटल, उज्जैन बटीक, जबलपुर मार्बल, डिंडोरी गोंड पेंटिंग, वारासिवनी साड़ी जैसी विधाएं जीआई की पात्र बनीं।
हीरा पन्ना, लोहा डिंडोरी, चिन्नौर चावल बालाघाट, सुंदरजा आम रीवा, शरबती गेहूं सीहोर-विदिशा, महोबा पान, नागपुरी संतरा छिंदवाड़ा-पांढुर्णा, कड़कनाथ झाबुआ, रतलाम सेव, गजक मुरैना, कठिया गेहूं बुंदेलखंड, जावरा लहसुन को मान्यता मिली।
भविष्य में और उत्पाद जीआई सूची में शामिल होंगे। इससे कारीगरों की आय बढ़ेगी और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षित रहेगी।