भारत और कनाडा ने रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम दिया है। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम सौदा प्रधानमंत्री मोदी और मार्क कार्नी की निगरानी में संपन्न हुआ। यह द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में मील का पत्थर साबित होगा।
भारत के सिविल न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए यह ईंधन आपूर्ति दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करेगी, स्वच्छ बिजली उत्पादन को बढ़ावा देगी। नेताओं ने ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत साझा प्रतिबद्धता जताई।
छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स सहित एडवांस्ड न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स पर एक साथ काम करने का ऐलान किया गया। सीईपीए वार्ता को तेज करने का फैसला हुआ, 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा।
2030 तक व्यापार को 50 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करने की रूपरेखा बनी, जिससे दोनों देशों में आर्थिक गतिविधियां चहल-पहल करेंगी। महत्वपूर्ण खनिजों, रिन्यूएबल एनर्जी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर अतिरिक्त एमओयू साइन हुए।
प्रधानमंत्रियों के समक्ष विदेश मंत्रियों जयशंकर और आनंद ने कागजातों का लेन-देन किया। मोदी ने कार्नी को बधाई दी, कहा कि साझा लोकतंत्र, विविधता सम्मान और वैश्विक भलाई संबंधों की नींव हैं।
जलवायु सहयोग विस्तार के तहत सौर गठबंधन और बायोफ्यूल गठबंधन में कनाडा की भागीदारी सराहनीय। तकनीकी मोर्चे पर एआई, क्वांटम तकनीक, सुपरकंप्यूटिंग व चिप निर्माण में प्रगति पर जोर दिया।