रामनाथपुरम में मिर्च उत्पादकों के लिए खुशी-गम दोनों हैं। मुंडू व सांबा मिर्च के दाम 20,000 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गए, लेकिन यह फसल बर्बादी का नतीजा है। कीटों, रोगों और सूखे ने तबाही मचा दी।
खेती का रकबा घटकर 13,500 हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले साल यह 15,050 था। फफूंद संक्रमण ने किसानों का हौसला तोड़ा। अब कटाई के समय कम आपूर्ति से भावों में उछाल आया।
निर्यातक एम. रामर के मुताबिक, मुंडू 25,000-36,000 और सांबा 20,000-25,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही। सामान्यत: ये 13,000-20,000 और 12,000-15,000 के दायरे में रहतीं। प्रति किलो भाव 360 और 220 रुपये तक पहुंचे।
बागवानी अधिकारी बताते हैं कि 2,500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र कीट प्रभावित हुआ। सूखे ने नुकसान दोगुना कर दिया। अय्यप्पन जैसे किसान कहते हैं, ‘टैंकर पानी खरीदने वाले ही निर्विरोध रहे।’
किसान संगठन सरकार से मुआवजा, कीटनाशक सब्सिडी और सिंचाई सुविधा की अपील कर रहे। यह घटना जलवायु परिवर्तन के खतरों को रेखांकित करती है। उपभोक्ताओं को भी महंगे मसालों का सामना करना पड़ सकता है। भविष्य में मजबूत रणनीति जरूरी।