भारत को विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस स्थापित करने का सुनहरा अवसर मिला है, जिससे 2040 तक 113 अरब डॉलर की भारी बचत हो सकती है। डेलॉइट और नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 1.9 करोड़ वर्ग फुट वर्टिकल स्पेस से विदेशी शिक्षा पर व्यय रुकेगा।
एनईपी 2020 भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में ले जा रही है। 5.3 करोड़ छात्रों की संख्या 2035 तक 7.2 करोड़ हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता संस्थानों का अभाव गंभीर समस्या है। जेईई-2025 में 54,000 सफल छात्रों को आईआईटी की महज 18,000 सीटें मिलीं।
18 विदेशी यूनिवर्सिटीज को मंजूरी मिल चुकी है। शिशिर बैजल ने कहा कि मात्र संख्या नहीं, बल्कि एसटीईएम, एआई, डेटा साइंस जैसे कोर्सों की गुणवत्ता पर जोर दें। दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई के साथ चंडीगढ़, कोच्चि, जयपुर उभरते हैं।
फैकल्टी विकास और स्वायत्तता वाले प्रशासनिक ढांचे जरूरी हैं। यह प्रयास छात्र आकांक्षाओं को पूरा कर भारत को शिक्षा का वैश्विक गढ़ बनाएगा, आर्थिक मजबूती के साथ।