चेन्नई। मरीना तट पर विकास की चकाचौंध मछुआरा समुदाय के लिए संकट बन गई है। त्रिप्लिकेन के अयोध्या कुप्पम और संथोम के श्रीनिवासपुरम के बीच 12 गांवों के मछुआरे दो फरवरी को मानव श्रृंखला बनाकर उतरेंगे सड़कों पर। ब्लू फ्लैग परियोजना के विस्तार और रोपकार प्रोजेक्ट को रोकने की मांग होगी।
हालिया बैठक में मछुआरा प्रतिनिधियों ने चिंता जताई कि ये योजनाएं मछली पकड़ने के पारंपरिक अधिकारों को कुचल देंगी। नाव रखने, जाल सुखाने और मछली बेचने की जगहें तेजी से सिकुड़ रही हैं। प्रदूषण से पहले ही नुकसान हो चुका, अब पार्किंग स्पेस भी गायब हो रही।
अयोध्या कुप्पम निवासी सेल्वराज बोले, ‘पिछले चरणों के लिए त्याग कर चुके। बैरियर लगे तो आंदोलन से हटवाए। लेकिन अब परिवार समुद्र तट से बेदखल होने के कगार पर हैं।’ शाम के व्यापारी भी परेशान – 2000 परिवार प्रभावित, जबकि सिर्फ 300 दुकानों को हरी झंडी।
के. भारती ने कहा, ‘मछुआरों पर सख्ती, अधिकारियों को छूट। बांस की झोपड़ियां, शौचालय सब बन रहे, हमारा क्या?’ मछुआरे विकास स्वागतयोग्य मानते हैं, मगर विकल्प दिए बिना विस्थापन अस्वीकार्य।
सरकार से वार्ता की मांग तेज। बिना सुरक्षा उपायों के तटीय संस्कृति खतरे में। दो फरवरी का दिन निर्णायक साबित होगा।