शेयर बाजार की दुनिया में एफएंडओ ट्रेडिंग का क्रेज चरम पर है। लेकिन वीकली और मंथली एक्सपायरी के बीच का फर्क समझना हर निवेशक के लिए अनिवार्य है। आइए जानते हैं इनकी बारीकियां।
डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की उम्र तय होती है—एक्सपायरी पर खत्म। निफ्टी फ्यूचर्स का उदाहरण लें: मंगलवार एक्सपायरी पर सेटलमेंट अनिवार्य। पहले बंद न करें तो ऑटो समाप्ति।
शुरुआत में सिर्फ मंथली, आखिरी गुरुवार। ट्रेडिंग बूम से 2016 में वीकली बैंक निफ्टी से शुरू। अब मंगलवार सभी के लिए—वोलेटिलिटी कंट्रोल का तरीका।
वीकली: तेज उतार-चढ़ाव, डे ट्रेडर्स का स्वर्ग। मंथली: स्थिरता, पोजीशनल ट्रेडिंग के लिए। लिक्विडिटी शानदार।
एक्सपायरी पर वॉल्यूम आसमान छूता है, हेजर्स सक्रिय। नए निवेशकों को चेतावनी: बिना तैयारी के नुकसान निश्चित। डेमो से शुरुआत करें।
जानकारी शक्ति है—उसे हासिल करें।