कई क्षेत्रों में अनिश्चितता के बीच भारत-अमेरिका ट्रेड डील फार्मा उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली है। सस्ती दवा उत्पादन क्षमता से भारत अमेरिका का प्रमुख सप्लायर है, और यह डील इस रिश्ते को और गहरा करेगी।
जोटा हेल्थकेयर चेयरमैन केतन जोटा के अनुसार, भारत में एफडीए-अप्रूव्ड प्लांट्स अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा हैं। पुरानी बीमारियों, जेनरिक और जीवनदायिनी दवाओं का ढेर सारा निर्यात अमेरिका को होता है। पीएम मोदी की कूटनीति से टैरिफ पर संतुलित समझौता हुआ, जो आर्थिक जीत है।
डायबिटीज, हाई बीपी, थायरॉइड दवाओं की डिमांड अमेरिकी बाजार में हमेशा बनी रहती है।
ईयू डील से एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म होने से व्यापार बढ़ेगा, टेक्नोलॉजी आएगी और उत्पादन लागत घटीगी। इससे भारतीय मरीजों को सुलभ दवाएं मिलेंगी।
इन डील्स से फार्मा निर्यात फलेगा-फूलेगा, वैश्विक स्थिति मजबूत होगी और आम आदमी को स्वास्थ्य लाभ पहुंचेगा। क्षेत्र की प्रगति सुनिश्चित है।