पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने राज्यसभा में बजट 2026-27 को सबकुछ भुला देने वाला बताया। सोमवार की चर्चा में उन्होंने युवाओं की 15 प्रतिशत बेरोजगारी पर निशाना साधा, जहां कार्यबल के 25 प्रतिशत से कम को स्थायी नौकरी।
आर्थिक सर्वेक्षण की कड़वी हकीकतों पर सरकार चुप्पी क्यों? पूंजी निवेश ठहरा, बेरोजगारी चरम पर, विकास सुस्त—इनसे निबटना सरकार की नाकामी।
जीडीपी का 30% जीएफसीएफ अटका। एफडीआई न्यूनतम। निजी निवेश 22%। कैपेक्स में 44 हजार करोड़ की कट—कारण? निवेश तीनों मोर्चों पर शून्य।
1.44 अरब जनसंख्या, 1.95 करोड़ कारखाना कर्मी। मैन्युफैक्चरिंग 16% जीडीपी। नौकरियां अनौपचारिकता की ओर। युवा 15% बेरोजगार।
इंटर्नशिप स्कीम का बुरा हाल—6 हजार ही बचे। बजट घोषणाओं पर कंजूसी, रक्षा-सेवाओं में रduction।
वृद्धि दर लुढ़की। सुधार गाड़ी रुकी। घाटे मामूली सुधार खर्च बचत से। कोई विजन नहीं—भूल जाओगे यह बजट।