त्रिपुरा में फ्लोरिकल्चर क्षेत्र ने रफ्तार पकड़ ली है। सात सालों में 59,100 किसानों को इससे लाभ हुआ है, बताया कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने। वेस्ट त्रिपुरा में विवेकानंद फ्लावर गार्डन उद्घाटन के मौके पर उन्होंने फूलों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला।
फूल शुभकामनाओं से लेकर धार्मिक-सामाजिक समारोहों तक हर जगह हैं। राज्य का अनुकूल मौसम फूलों की खेती को बढ़ावा दे रहा है। अब यह व्यवसाय लाखों की कमाई दे रहा है—बारजला के सेनतु भौमिक को 8 लाख, कांचनमाला के प्रदीप सरकार को 12 लाख, अन्य को 8-9 लाख सालाना।
खेती का रकबा 2,738 से 11,720 कनि, किसान 2,190 से 59,100 और पैदावार 1,117 से 2,704 मीट्रिक टन बढ़ी। स्थानीय उत्पादन अब 89% मांग पूरी कर रहा, आयात घटकर 21% रह गया।
ऑर्किड, जर्बरा जैसे महंगे फूलों के लिए संरक्षित खेती बढ़ी—इकाइयां 225 से 504, हिस्सा 25 से 43%। मंत्री ने किसानों की सराहना की, कहा—फूल जीवन में सकारात्मकता लाते हैं। त्रिपुरा का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा है।