पाकिस्तान की बिगड़ती स्थिति चीन के सीपेक प्रोजेक्ट के लिए खतरे की घंटी बजा रही है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस्लामाबाद में असुरक्षा के कारण चीनी अधिकारियों की यात्रा मुश्किल होने पर बीजिंग संबंधों पर विचार करने को मजबूर हो सकता है। हर नई बाधा सीपेक को नुकसान पहुंचा रही है और अरबों डॉलर के चीनी हितों को जोखिम में डाल रही है।
आईएसपीआई की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की पश्चिमी सीमाओं पर आर्थिक साम्राज्य की महत्वाकांक्षाएं पाक-अफगान तनाव से चूर हो रही हैं। 2025 के अक्टूबर में सीमा पर घातक हमले हुए, जबकि 2021 के बाद से दोनों देशों के रिश्ते खराब होते जा रहे हैं।
62 अरब डॉलर के दांव के एक दशक बाद चीन पाकिस्तान के घरेलू आतंकवाद और पड़ोसी संघर्षों से बेहद व्यथित है। ये मुद्दे सीपेक की सफलता के लिए सबसे बड़ी बाधा हैं।
ग्वादर बंदरगाह के इर्द-गिर्द बनी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अरब सागर एक्सेस का लक्ष्य रखती हैं। मगर अशांति के कारण अपेक्षित फायदे दूर हैं, प्रगति कई जगह थम चुकी है।
बलूचिस्तान में बीएलए के अटैक ने ग्वादर को निशाना बनाया है। 2024 में हवाई अड्डे का ऑनलाइन उद्घाटन सुरक्षा चिंताओं का प्रमाण है। ऊपर से टीटीपी के खैबर पख्तूनख्वा अभियान ने स्थिति को और जटिल बना दिया। चीन को अब कठोर फैसले लेने पड़ सकते हैं।