ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत में आयोजित पब्लिक लेक्चर में सिरिल श्रॉफ ने कानून के भविष्य में एआई इनोवेशन और नैतिकता को महत्वपूर्ण बताया। सिरिल अमरचंद मंगलदास के प्रमुख और एआई-कानून सेंटर के चेयरमैन श्रॉफ ने बदलते विश्व में भारतीय कानूनी पेशे की पुनर्परिभाषा पर विचार रखे।
नेतृत्व को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ते हुए उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की बात की जो वैश्विक संकटों में कानून के शासन पर अडिग रहेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत कमजोरी के बीच भारत के घरेलू ढांचे मजबूत हैं। लोकतंत्र की खामियां हैं लेकिन अदालतें और संस्थाएं सुचारु रूप से काम कर रही हैं।
संविधान समर्थित संस्थाएं हमारी वैश्विक स्थिति तय करती हैं। प्राचीन सभ्यता की जड़ें हमें मजबूत बनाती हैं। संविधान केवल कागज नहीं, जीवन पद्धति है। आर्थिक स्वतंत्रता के बाद तकनीकी स्वायत्तता जरूरी, जहां एआई केंद्रीय होगा।
सेंटर इसी जरूरत से जन्मा। 2047 का भारत विकसित होगा यदि कानूनी शिक्षा और पेशा बदले। फर्म ने गैर-परिवारिक पार्टनरशिप और करियर पथ गढ़े। एआई नए नियम ला रहा, नैतिकता आधार बनेगी। तकनीक से तेज विवाद निपटान, न्याय सुधार और पहुंच वृद्धि संभव।
परिधि अदाणी ने सेंटर के सहयोगी मॉडल की तारीफ की। प्रो. सी. राज कुमार ने श्रॉफ और फर्म के योगदान को ऐतिहासिक बताया। महिलाओं का नेतृत्व उनकी फर्म की ताकत है। युवाओं को आधुनिक भारत के लिए पेशा बदलने को कहा। मुख्य विचार: एआई-विनियमन इंटरफेस, सेंटर का वैश्विक प्रभाव, नैतिक चुनौतियों पर सहयोग।