आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारत के निवेश परिदृश्य में खुदरा उफान की तस्वीर पेश की है। संसद में जारी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ माह में 2.35 करोड़ नए डीमैट खाते खुले, जो वैश्विक तनावों के बावजूद परिवारों के बढ़ते विश्वास को दिखाता है।
शेयर बाजारों ने संतुलन बनाए रखा। घरेलू पूंजी, मजबूत कॉरपोरेट नतीजे, टैक्स छूट, नियंत्रित मुद्रास्फीति और नीतिगत समर्थन से निफ्टी 11.1 प्रतिशत तथा सेंसेक्स 10.1 प्रतिशत चढ़े।
सितंबर में यूनिक डीमैट निवेशक 12 करोड़ के पार पहुंचे, एक-चौथाई महिलाएं। म्यूचुअल फंड्स के 5.9 करोड़ निवेशकों में बहुमत छोटे शहरों से। बचत का रुझान बाजार की ओर है—हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से 15 प्रतिशत+ हो गई।
एसआईपी ने क्रांति लाई, मासिक प्रवाह 4,000 करोड़ से 28,000 करोड़+। आईपीओ 20 प्रतिशत अधिक, एसएमई ने 217 लिस्टिंग से 9,600 करोड़ जुटाए। बॉन्ड बाजार में 12 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि, 9.9 लाख करोड़ नए जारी।
भारत अब निवेश के लोकतंत्रीकरण की ओर अग्रसर है, जहां हर नागरिक धन सृजन में भागीदार बन रहा है।