भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट निर्यात तेजी, नवाचार और स्वावलंबन की नई कहानी लिखेगा। ईएससी चेयरमैन वीर सागर ने इसे बहुपक्षीय साझेदारी का दुर्लभ उदाहरण बताया।
इस समझौते से आईटी क्षेत्र में क्रांति आएगी। भारत अब इनोवेशन, डिजाइनिंग, एआई और ऑटोमेशन में यूरोप के बराबर साझीदार बनेगा, न कि सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर।
यूरोप यात्रा के लिए अनुमतियां पहले भूलभुलैया जैसी थीं। एफटीए से प्रक्रिया सरल होगी, जिससे पेशेवर व शैक्षिक आदान-प्रदान बढ़ेगा।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल मिलेगा। संयुक्त निर्माण मॉडल अपनाया जाएगा—भारत में पुर्जे, यूरोप में असेंबली। इससे पारस्परिक जिम्मेदारी बढ़ेगी।
देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता ने इसे संभव बनाया। अब फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, वित्तीय सेवाओं समेत विविध क्षेत्रों में भारत की भूमिका प्रमुख होगी।
ज्ञान साझाकरण और तकनीकी आदान-प्रदान से भारत न केवल व्यापार बढ़ाएगा, बल्कि विश्व पटल पर उत्पादन शक्ति और इनोवेशन हब के रूप में चमकेगा।