भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल और ज्वेलरी क्षेत्रों के लिए सुनहरे द्वार खोल दिए हैं। जानकारों के अनुसार, यह निर्यात वृद्धि, नौकरियों का सृजन और भारत को लंबी अवधि के आपूर्तिकर्ता के रूप में चमकाने वाला साबित होगा।
दोधिया सिंथेटिक्स लिमिटेड के निदेशक भद्रेश दोधिया ने कहा कि ईयू का टेक्सटाइल आयात 250 अरब डॉलर का है, लेकिन भारत का योगदान नगण्य है। पड़ोसी प्रतिद्वंद्वी ड्यूटी-फ्री पहुंच से आगे निकल चुके हैं। राजनीतिक उथल-पुथल से प्रभावित यूरोप भारत जैसे स्थिर भागीदार की तलाश में है।
पीएम मोदी के नेतृत्व में हालिया समझौते उद्योग को गति दे रहे हैं, मगर गुणवत्ता और स्थिरता मानकों का पालन जरूरी। कंपनी का 20 प्रतिशत निर्यात यूरोप को जाता है, जो एफटीए से और मजबूत होगा। सर्कुलर इकोनॉमी में भारत की क्षमता विशाल है।
सरकार की आत्मनिर्भर पहल से छोटे उद्योग सशक्त होंगे। भारत का मजबूत लोकतंत्र, युवा बल और विशाल बाजार वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करते हैं। यह ऐतिहासिक मौका भारतीय उद्योग की सस्टेनेबिलिटी को प्रेरित करेगा।
ज्वेलरी में रोहित गुप्ता ने इसे क्रांतिकारी बताया। जयपुर की जेम कटिंग इकाइयां ड्यूटी-मुक्त आयात से मूल्यवर्धन कर इटली, फ्रांस जैसे बाजारों में छा सकती हैं। पूर्वी यूरोप के पुराने केंद्र पीछे छूटेंगे, जबकि भारत सस्ते श्रम और कारीगरी से आगे बढ़ेगा। यह सौदा दोनों पक्षों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।