भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट निर्यात क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भारतीय व्यवसायों को यूरोप में वियतनाम, मलेशिया, थाईलैंड, बांग्लादेश और श्रीलंका से बेहतर मुकाबला करने की ताकत देगा।
पॉलीमेडिक्योर के सीईओ हिंमाशु वैध ने कहा कि 27 देशों वाले इस विशाल बाजार तक पहुंच निर्यात को नई उड़ान देगी। ‘टैरिफ कम होने से बड़ी मात्रा में व्यापार संभव होगा,’ उन्होंने जोर दिया। साथ ही, तकनीकी हस्तांतरण से घरेलू उत्पादन मजबूत होगा।
यह समझौता निवेशकों को लुभाएगा और मैन्युफैक्चरिंग को गति प्रदान करेगा। यूरोप को भारत का उभरता बाजार मिलेगा।
ईपीसीएमडी के चेयरमैन आर.एस. कंवर ने चिकित्सा उपकरण क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव की बात की। ‘शून्य ड्यूटी अच्छी शुरुआत है, पर नियामक बाधाएं दूर हों तो असली फायदा होगा।’
पीएम मोदी के शब्दों में, यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि समृद्धि का नया मॉडल है। कृषि, एमएसएमई और सेवाओं के लिए अवसरों की भरमार होगी। भारत वैश्विक व्यापार में मजबूत कदम रख रहा है।