सार्वजनिक बैंकों के कर्मचारी मंगलवार को सड़कों पर उतर आए, पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग लेकर। यूएफबीयू ने नौ यूनियनों को एकजुट कर यह हड़ताल बुलाई। श्रम आयुक्त से बातचीत विफल होने के बाद यह फैसला लिया गया।
बड़े बैंकों में सेवाएं ठप, निजी बैंक अप्रभावित। लखनऊ से वडोदरा, पटना, रायपुर तक आंदोलन छाया। अंशिका सिंह ने कहा, द्विपक्षीय करार का उल्लंघन हुआ। कार्यभार से वर्कलाइफ बैलेंस बिगड़ा। हम योजनाओं के वाहक हैं।
झा ने ज्ञापनों की अनदेखी पर नाराजगी जताई। रीतिका ने तनाव की मार बताई। छत्तीसगढ़ में हजारों सड़कों पर। आठ लाख से ज्यादा शामिल। ग्राहक भटके। यह मांग पुरानी है, समय आ गया समाधान का।