देश का विद्युत ट्रांसमिशन ढांचा अब 5 लाख सर्किट किलोमीटर को पार कर चुका है। मंत्रालय के बयान में बताया गया कि रूपांतरण क्षमता भी 1,407 जीवीए हो गई है, जो बिजली क्षेत्र की प्रगति को दर्शाता है।
यह उपलब्धि 14 जनवरी 2026 को हासिल हुई, जब राजस्थान की 765 केवी भादला-सीकर लाइन शुरू की गई। 628 सीकेएम यह लाइन सौर ऊर्जा को प्रभावी ढंग से पहुंचाएगी।
भादला, रामगढ़ व फतेहगढ़ से 1,100 मेगावाट बिजली का अतिरिक्त निर्यात संभव हुआ, सौर संसाधनों का बेहतर दोहन करेगी।
2014 से 71.6% वृद्धि दर्ज की गई। 2.09 लाख सीकेएम उच्च वोल्टेज लाइनें व 876 जीवीए क्षमता बढ़ी। 1,20,340 मेगावाट अंतर-क्षेत्रीय क्षमता से एकीकृत ग्रिड तैयार।
भविष्य की योजनाओं में 40,000 व 27,500 सीकेएम नई लाइनें शामिल हैं, जो 399 व 134 जीवीए क्षमता जोड़ेंगी। 2030 का 500 जीडब्ल्यू लक्ष्य अब करीब।
यह प्रगति नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देगी, सस्ती व सुरक्षित बिजली आपूर्ति को मजबूत करेगी। भारत ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेता बनने की ओर अग्रसर है।