देश की राजधानी नई दिल्ली से खबर है कि सुकन्या समृद्धि योजना अपने 11वें वर्ष में कदम रख चुकी है। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत आरंभ यह स्कीम बालिकाओं की शिक्षा-विवाह के लिए सुरक्षित बचत का सशक्त माध्यम बनी है। 8.2% ब्याज और मूलधन सुरक्षा के साथ यह जोखिम मुक्त निवेश है।
माता-पिता बालिका के 10 साल पूरे होने से पहले पोस्ट ऑफिस या पीएसयू व निजी बैंकों में खाता खोल सकते हैं। परिवार प्रति दो बालिकाओं तक सीमित, लेकिन बहुगर्भ के लिए लचीलापन। 18 वर्ष से पहले अभिभावक प्रबंधन, उसके बाद स्व नियंत्रण—यह व्यवस्था बचत को सुनिश्चित करती है। देशभर स्थानांतरण योग्य।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 4.53 करोड़ खाते और 3.33 लाख करोड़ की जमा राशि इसकी लोकप्रियता दर्शाती है। योजना महिला सशक्तिकरण को गति दे रही है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ने भ्रूण हत्या रोकी, लिंग असंतुलन ठीक किया और शिक्षा को प्राथमिकता दी। बहु-मंत्रालयी सहयोग से चली यह मुहिम समाज की सोच बदल रही है।
इन पहलों ने बेटियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा, भारत को आत्मनिर्भर नारी शक्ति प्रदान करेगा।