आगामी केंद्रीय बजट से स्वास्थ्य उद्योग को अपार आशाएं हैं। 1 फरवरी 2026 को पेश इस बजट में व्यय वृद्धि, जीएसटी सुधार, डिजिटलीकरण व शोध पर जोर की उम्मीद है। यह स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने का सुनहरा अवसर साबित हो सकता है।
जीडीपी के 3-5 प्रतिशत तक स्वास्थ्य बजट बढ़ाना अनिवार्य है। एनसीडी से 65 प्रतिशत मृत्यु दर के बीच वर्तमान खर्च अपर्याप्त है।
विशेषज्ञों का मत है कि 2.5 प्रतिशत से अधिक व्यय से भविष्योन्मुखी इकोसिस्टम तैयार होगा। नीतियों का प्रभावी अमल अब जरूरी है।
मेडिकल डिवाइसेज पर 5 प्रतिशत जीएसटी सही दिशा में कदम था, अब 18 प्रतिशत वाले इनवर्टेड मामलों को ठीक कर स्थानीय इकाइयों को राहत दें।
आयात पर 80 प्रतिशत निर्भरता समाप्त करने हेतु ‘बाय इंडिया’ व पीआरआईपी को विस्तार दें, उच्चस्तरीय उपकरण स्वदेश में बनें।
ग्रामीण व छोटे शहरों में स्वास्थ्य ढांचे मजबूत करने हेतु पीएसएल व वीजीएफ से हब व विशेष अस्पताल बनें, पहुंच बढ़े।
डिजिटल हेल्थ, एआई व आईओटी से प्रतिक्रियात्मक व्यवस्था प्रिवेंटिव बनेगी। प्रारंभिक निदान से उपचार किफायती होगा।
फार्मेसी से होम केयर तक डिजिटल एकीकरण व इनोवेशन प्रोत्साहन से सेवाएं सर्वसुलभ होंगी।
कुल मिलाकर ठोस कदमों से बजट स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा देगा, जो भारत को वैश्विक पटल पर मजबूत बनाएगा।