पटना शहर गंगा की लहरों पर नई यात्रा का साक्षी बनेगा, जहां 908 करोड़ रुपये की लागत से वाटर मेट्रो प्रोजेक्ट धरातल पर उतर रहा है। पहले चरण में गांधी घाट और गाय घाट को मुख्य स्टॉप बनाया गया है। पर्यटन विभाग के अनुसार, गांधी घाट पर चार्जिंग पॉइंट बनना शुरू हो गया है और कंगन व दीघा घाट पर भी कार्य योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा। कुल 10.5 किमी का यह सफर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
दो पर्यावरण हितैषी हाइब्रिड नावें बैटरी संचालित होंगी, जिनमें पावर बैकअप और एसी की पूर्ण सुविधा होगी। नावों में जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी और हाई-स्पीड पर कम तरंगें उत्पन्न करने वाली तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु रेस्क्यू बोट्स की तैनाती अनिवार्य है।
‘एमवी गोमधर कुंवर’ नामक नाव की अनुमानित कीमत 12 करोड़ रुपये से ऊपर है। बिहार सरकार और इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी का यह साझा प्रयास कोचि शिपयार्ड की विशेषज्ञता से मजबूत हो रहा है। प्रारंभिक मार्ग करीब 10 किमी का होगा, जो कंगन घाट से गाय घाट, गांधी घाट, दीघा, फरक्का महतो घाट, नारियल घाट, पानापुर, कोन्हारा घाट, काली घाट (सोनपुर) होकर छेछर घाट पर विराम लेगा।
दूसरे चरण में हाजीपुर व सोनपुर को जोड़ते हुए 10 टर्मिनल्स वाले चार रूट्स विकसित होंगे। यह परियोजना पटना के ऐतिहासिक घाटों को पुनर्जीवित करेगी, पर्यटन उद्योग को गति प्रदान करेगी और शहरवासियों को सुगम जलयात्रा का विकल्प देगी। प्रोजेक्ट की प्रगति उत्साहजनक है।