तीन दशकों से अधिक इंतजार के बाद बिहार की अदालत ने एक दिल दहला देने वाली घटना के दोषियों को सजा दी। मुजफ्फरपुर के सिवराहां चतुर्भूज गांव में 1991 का वह काला दिन, जब एक महिला को पेड़ से बांधा गया और उसके भाई को गोली मारकर मार डाला, आज एडीजे-5 की अदालत में सजा का रूप ले चुका।
न्यायाधीश आलोक कुमार पांडेय ने बैधनाथ राय, रामबलम राय, महंथ राय, रामचंद्र पासवान व सहदेव राय को उम्रकैद की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 50 हजार जुर्माना भी ठोका गया। 9 अगस्त 1991 को बैधनाथ अपनी बंदूक व साथियों के हथियारों संग मोहन राय के खेत पर पहुंचे। ट्रैक्टर चलाने पर बसंती देवी को बेरहमी से पीटकर पेड़ से बांध दिया।
कुंवर राय ने बहन को बचाने की कोशिश की तो बैधनाथ ने तीन गोलियां दागीं। घायल कुंवर की बांह तोड़कर हत्या कर दी गई। मोहन के बयान पर 13 आरोपी बनाए गए। अपर लोक अभियोजक सुनील कुमार पांडेय के प्रयासों से साक्ष्य मजबूत हुए।
परिवार ने सजा को इंसाफ की जीत कहा। ‘मां के सामने मामा की हत्या का बदला मिला,’ मोहन ने कहा। यह मामला देरी से न्याय मिलने की मिसाल है, जो अपराधियों को सबक सिखाता है।