उपेंद्र कुशवाहा बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने को बेताब हैं। वे खुद के लिए राज्यसभा टिकट और बेटे दीपक के नाम एमएलसी सीट की मांग अमित शाह व नितिन नबीन से कर रहे हैं। दिल्ली में शाह के घर पर सोमवार रात हुई बैठक में राज्यसभा चुनाव पर विस्तार से बात हुई। कुशवाहा अपनी राष्ट्रीय लोक मोर्चा को विलय करने को तैयार नहीं, बल्कि अपने सिंबल पर चुनाव लड़ना चाहते हैं।
चुनावी वादे के तहत बेटे को एमएलसी बनाने का भरोसा बीजेपी ने दिया था। आरएलएम के चार विधायकों के बावजूद कुशवाहा की कोइरी वोटरों पर पकड़ मजबूत है। विलय से बीजेपी को फायदा होगा- विधानसभा में तीन अतिरिक्त सीटें, राज्यसभा में बढ़त और कुशवाहा को केंद्र मंत्री बनाए जाने का रास्ता। उनके विधायकों को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
फिलहाल कुशवाहा चुप हैं, लेकिन चुनाव बाद विलय संभव बता रहे हैं सूत्र। बीजेपी की ओर से कोई टिप्पणी नहीं। बिहार एनडीए में यह सौदा जातिगत समीकरण को प्रभावित करेगा। कुशवाहा का अनुभव बीजेपी के लिए लाभदायक है।
सियासी घमासान तेज हो गया है। क्या निजी महत्वाकांक्षाएं पार्टी हितों पर भारी पड़ेंगी? बिहार की सत्ता की कुर्सी पर नजरें टिकी हैं।