मध्य पूर्व में इजरायल-ईरान के बीच भड़के युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। अमेरिका और खाड़ी के कई देशों की भागीदारी से हालात और खराब हो गए हैं। बिहार के भागलपुर में इसका सीधा असर दिख रहा है, जहां रेशम उद्योग को 25 करोड़ रुपये के ऑर्डर रद्द होने से सदमा लगा है।
सिल्क सिटी के नाम से विख्यात इस जिले के करघों पर सन्नाटा पसर गया है। 18 घंटे की हलचल अब 5-6 घंटे में सिमट चुकी। कोलकाता-दिल्ली मार्ग से निर्यात होने वाले रेशमी उत्पादों के खरीदार पीछे हट गए हैं। अस्थिरता ने कारोबार ठप कर दिया।
चंपानगर में जहां हर गली में लूम गूंजते थे, अब आधे से ज्यादा ठप। हेमंत कुमार जैसे बुनकर कहते हैं, ‘महंगाई की चोट सह ली थी, युद्ध ने कमर तोड़ दी।’ 50-60 लाख के उनके ऑर्डर सहित पूरे सेक्टर को करोड़ों का चूना लगा।
बुनकर आलोक का गुस्सा फूटा, ‘युद्ध का पहला शिकार हम होते हैं, सरकार सो रही है।’ अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल, पेमेंट रुकना और कंटेनर अटकना ने बेरोजगारी बढ़ा दी।
दूर के युद्ध की चिंगारी यहां के सपनों को राख कर रही है। शीघ्र सामान्यता न लौटी तो भागलपुर की सिल्क विरासत और परिवारों की रोजी खतरे में।