मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा चौक से रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो उभरा है, जिसमें एक मां अपनी बेटी पर जुल्म के पराक्रम दिखा रही है। स्कूल बैग में ईंटें ठूंसकर बच्ची को तड़पा रही मां का यह कारनामा सोशल मीडिया पर तूफान ला चुका है।
क्लिप में यूनिफॉर्म में छोटी बच्ची बोझ तले लाचार दिख रही है। बैग का वजन इतना कि वह लड़खड़ा रही है, रुक-रुक कर फूट-फूट रो रही है। चिंतित राहगीरों ने बैग खोला तो किताब-खाते के संग चार ईंटें! मौके पर सन्नाटा छा गया।
बच्ची के साथ मां ही थी, जो उसे फटकार रही है, चिल्ला रही है, हाथों से लताड़ रही है। हस्तक्षेप पर बोली, ‘मेरी औलाद, जैसा चाहूं वैसा करूं—शिकायत कर लो।’ विरोध ज्यों का त्यों बढ़ा तो सड़क पर ही थप्पड़ ठोका, गाल नोचे बिना दया के।
भीड़ लग गई। कोई मना रहा था, कोई बच्ची को गले लगा रहा था। पूछने पर मां का जवाब, ‘ऐसा ही तो सुधार होता है।’ टकराव चरम पर पहुंचा, फिर बच्ची को घसीट ले गई।
वायरल के बाद नेटवर्क पर गुस्सा भरा पड़ा। सब बाल शोषण का केस मानकर अफसरों पर दबाव डाल रहे हैं। क्या खुले में ऐसा जुल्म जायज?
घटना परिवारिक कलह से ऊपर उठती है—समाज को झकझोरती है। माता-पिता की क्रूरता कब रुकेगी? प्रशासन को कदम उठाने होंगे: बच्ची को बचाओ, केस की गहराई जांचो, सजा दो। संदेश साफ—बच्चों पर किताबें लादो, ईंटें नहीं।