बिहार के दरभंगा में हरिनगर गांव हाहाकार में डूबा है। पैसे के पुराने झगड़े पर हिंसा के बाद 70 परिवारों के पुरुष कहीं गायब। महिलाएं डरी हुई हैं, पुलिस का पहरा है लेकिन जीवन ठप।
कहानी 2015 से शुरू, विक्रम पासवान को हेमकांत झा के मकान काम के 2.5 लाख नहीं मिले। 30 जनवरी को दामाद के आने से झड़प, 31 को हिंसा—लोहे की रॉड, लाठियों से हमला, पीटाई, महिलाओं पर अत्याचार, चोरी। एससी/एसटी कानून के तहत 70 ब्राह्मणों व 150 अन्य पर केस।
पुरुष गिरफ्तारी से भागे, गांव सुनसान। एक महिला बोलीं, ‘हमेशा भाईचारा था, अब भय। बाजार बंद, जरूरतें अधर में।’ मुखिया विमल चंद्र खान बोले, 30 को कार्रवाई होती तो 31 का तांडव न होता। एसएसपी ने निर्दोष बचाने का वादा किया।
डीएसपी ने 12 पकड़े, 10 घायल, जांच जारी। सुरक्षा मजबूत लेकिन तनाव बरकरार। बिहार के गांवों में आर्थिक विवादों का यह चेहरा चिंताजनक है।