पूर्णिया में ब्लॉगर सूरज बिहारी हत्याकांड ने सनसनी फैला दी। महंगे लाइफस्टाइल और सुरक्षा के बावजूद उसकी जान चली गई। 36 घंटे गुजर गए, सात आरोपी अभी भी फरार। मरंगा पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन एक्शन नदारद।
जवाहर यादव के बेटे सूरज का जीवन किसी फिल्म से कम नहीं था। पिता के बिजनेस से मोटी कमाई, आठ पॉश गाड़ियां, रील्स से लाखों फॉलोअर्स। पार्टी, ट्रिप्स—सबका शौकीन। पिता ने सुरक्षा के लिए गार्ड प्रेम सिंह रखा, खुद पिस्टल लाइसेंसी। फिर भी, बसंत बिहार में सब धरी रह गई।
सोशल मीडिया विवाद ने आग लगाई। नेवालाल चौक के सुबोध शर्मा ने पूजा पर वीडियो पोस्ट किया। स्नेहिल झा ने सुबोध को उठा पीटा। बदला लेने सुबोध पहुंचा स्नेहिल के घर, तो विपक्ष ने काउंटर अटैक किया। तीन दिन चलेगा झगड़ा तीसरे दिन चरम पर।
सूरज का भाई सुबोध समर्थक। कॉल पर सूरज गार्ड संग आया। स्नेहिल ने ब्रजेश सिंह को बुलाया। आठ गुंडे बाइकों पर घेरा डाला। सूरज हथियार निकाल रहा था, दो फायर लगे। गार्ड को भी निशाना। सीसीटीवी ने रिकॉर्ड कर लिया।
हॉस्पिटल में सूरज मृत घोषित। उदय के बयान पर ब्रजेश (फरार कातिल, आर्म्स केस), नंदू, स्नेहिल, आदित्य, अमन, रजनीश, अंशु आरोपी। ब्रजेश रुपौली का है, 2018 में हाउस फादर हत्या के बाद भागा।
बिहार की सड़कों पर कानून का राज खतरे में। सूरज जैसा प्रभावशाली भी सुरक्षित नहीं। पुलिस फौरन कदम उठाए, वरना अविश्वास बढ़ेगा।