बिहार चुनाव की करारी हार अभी ठंडी भी नहीं हुई और आरजेडी में भाई वीरेंद्र नाम का तूफान आ गया। मनेर विधायक ने वायरल वीडियो में पार्टी के टॉप नेताओं को टिकट वितरण के लिए ललकारा है। वफादार कार्यकर्ताओं के साथ धोखे का आरोप लगाते हुए उन्होंने खुली बगावत कर दी।
क्लिप में वे बोलते हैं, ‘विजय मंडल और मैं एक साथ विधायक बने। उनकी क्या गलती थी? मैंने दल में जमकर संघर्ष किया। बाहरी जिलों वालों को टिकट देकर हमारे लोगों को क्यों ठुकराया?’ गुस्से में उनका चेहरा तमतमाया नजर आ रहा।
भाई वीरेंद्र ने ‘समाजवादी’ बनने वालों को भी कोसा जो कई जिलों में प्रभाव रखते हैं। ‘इनके इशारे पर टिकट मिलते रहेंगे तो हर पार्टी का पतन होगा, जैसा हमारा हुआ।’ यह बातें पार्टी कार्यालयों में बहस छेड़ रही हैं।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने दोहराया, ‘सच मेरी पहचान है। पार्टी लुटेरों को साफ करना जरूरी।’ इससे内部 कलह की पोल खुल गई।
बीजेपी के प्रभाकर मिश्र ने तंज कसा, ‘भाई वीरेंद्र ने राजद की पोल खोल दी। जाति और रिश्तेदारी की हार है यह। जानबूझकर कुछ को हरवाया गया। जनता सब जानती है, भरोसा खत्म।’
जेडीयू की पूजा एन शर्मा ने चुटकी ली, ‘मनेर जैसे सीट जीतने वाले को टिकट चयन पसंद नहीं तो क्या कहें? खरीद-फरोख्त से कार्यकर्ता हाशिए पर। नतीजा वोटों में। विपक्ष नेता के जख्म हरे हैं, नमक लग गया।’
पार्टी के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। यह विद्रोह बदलाव का संकेत है या विघटन का? बिहार राजनीति में नया मोड़।