लोक मान्यताओं के अनुसार, मिथिला के राजा जनक जब भी गंगा स्नान के लिए जाते थे, तो वे बटेश्वरनाथ धाम में रुककर भगवान शिव की आराधना अवश्य करते थे। यहाँ महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी पर भव्य मेले लगते हैं, जो एक महीने तक चलते हैं। इस मंदिर की ख्याति इतनी है कि नेपाल और रूस से भी भक्त यहाँ आते हैं। मंदिर में नंदी की विशाल प्रतिमा और वटवृक्ष के भीतर समाहित शिवलिंग भक्तों के लिए गहरी आस्था और प्राकृतिक चमत्कार का केंद्र हैं।
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