हिंदी साहित्य में रामधारी सिंह दिनकर के योगदान को उनकी जयंती पर याद किया गया। रवींद्र रंजन ने दिनकर को भारत रत्न देने की पुरजोर वकालत की। उनका मानना था कि दिनकर भारत रत्न के हकदार थे और उनकी रचनाएँ संघर्ष का प्रतीक हैं। दिनकर ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और स्वतंत्रता के बाद भी अपनी लेखनी से लोगों को प्रेरित किया। डॉ. प्रेम कुमार मणि ने दिनकर की रचनाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे हमेशा प्रासंगिक रहेंगी। दिनकर के नाम पर एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की भी मांग की गई।
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