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    Home»Auto»ट्रंप के नए वीज़ा नियम: कंपनियों पर वित्तीय बोझ
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    ट्रंप के नए वीज़ा नियम: कंपनियों पर वित्तीय बोझ

    Indian SamacharBy Indian SamacharSeptember 20, 20252 Mins Read
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    डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा पर एक नया शुल्क लागू करके एक बार फिर वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है. इस फैसले से Apple से लेकर Amazon तक कई बड़ी कंपनियों पर असर पड़ेगा. यह शुल्क 1 लाख डॉलर का है, जिससे अमेरिका में काम करने के इच्छुक विदेशी कर्मचारियों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी.

    H-1B वीज़ा, कुशल विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है. इस वीज़ा के लिए अब लगभग 88 लाख रुपये अतिरिक्त फीस देनी होगी. नए नियम के अनुसार, 1,00,000 डॉलर का भुगतान करने के बाद ही H-1B वीज़ा धारक अमेरिका में प्रवेश कर पाएंगे.

    यह शुल्क अमेज़न, आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ाएगा. H-1B वीज़ा की पहले से ही उच्च लागत है, जो 1,700 से 4,500 डॉलर के बीच है. यह शुल्क उन कंपनियों के लिए अतिरिक्त चिंता का विषय होगा जो विदेशी कर्मचारियों पर निर्भर हैं, खासकर प्रौद्योगिकी और आईटी क्षेत्रों में.

    अमेज़ॅन के 10,044 कर्मचारी जून 2025 तक H-1B वीज़ा पर थे, जिसके बाद TCS, Microsoft, Meta, Apple, Google, Deloitte, Infosys, Wipro और Tech Mahindra जैसे कंपनियों के कई कर्मचारी थे. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन कंपनियों ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की और H-1B भर्ती बढ़ाई, जिससे अमेरिकी कर्मचारियों को नुकसान हुआ. इन कंपनियों ने H-1B सिस्टम का दुरुपयोग किया, जिससे उन्हें लागत बचाने में मदद मिली.

    एक रिपोर्ट के अनुसार, H-1B के तहत ‘प्रारंभिक स्तर’ की नौकरियों में नियमित कर्मचारियों की तुलना में 36% कम वेतन दिया जाता है. कई कंपनियां अपनी आईटी शाखाओं को बंद कर देती हैं और अमेरिकी कर्मचारियों को निकालकर, विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखकर श्रम लागत को कम करती हैं. प्रशासन का मानना ​​है कि कम वेतन वाले कर्मचारियों की अधिक संख्या अमेरिकी कर्मचारियों के लिए मजदूरी और रोजगार के अवसरों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है.

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