पानी का सेवन हर उम्र के लिए जरूरी है, जो बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। तांबे के घड़े में रात भर रखा पानी आयुर्वेद में ताम्रजल कहलाता है, जो पाचन सुधारने और detoxification में सहायक माना जाता है। लेकिन सभी को यह सूट करता है क्या?
आयुर्वेद के अनुसार, हर औषधि व्यक्ति, ऋतु और अवस्था पर निर्भर करती है। ताम्रजल गर्म तासीर का है, जो भोजन पचाने में मददगार तो है, किंतु पित्ताशय को उत्तेजित कर त्वचा रोग या जलन पैदा कर सकता है।
डायबिटीज पीड़ितों के लिए वर्जित। पित्त प्रधान प्रकृति में यह गर्मी बढ़ाता है, इंसुलिन प्रभावित होता है। लीवर या किडनी रोगी इसे न पिएं, वरना फिल्ट्रेशन बाधित हो जाती है।
बच्चों की कोमल पाचन क्रिया इसे सहन नहीं कर पाती, खासकर प्रातःकाल। वैज्ञानिक शोध भी कॉपर ओवरलोड से शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव की पुष्टि करते हैं।
सही व्यक्ति के लिए ताम्रजल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। प्रकृति जanchवाकर उपयोग करें। शुद्ध पानी ही सर्वोत्तम, तांबे का चयन विवेकपूर्ण हो। आयुर्वेद की गहराई से सीखें स्वस्थ जीवनशैली।