सेलिब्रिटी शेफ विकास खन्ना का कहना है कि पश्चिम में भारतीय भोजन एक बड़े रूपांतरण की कगार पर खड़ा है। मास्टरशेफ इंडिया के नौवें सीजन के फिनाले के सेट पर रणवीर बरार व कुणाल कपूर संग बातचीत में उन्होंने जाहिर किया कि पाककला कभी ठहराव में नहीं आती।
“खाने को फ्रेम में बंद करके रखा नहीं जा सकता,” उन्होंने कहा। “यह कला स्वाद, दिखावट, सेवा शैली और सज्जा में सतत बदलाव लाती है, मगर मूल स्वाद और आराम की नींव अटल रहती है। विदेशी धरती पर भारतीय डिशेज का यह नया अवतार रोमांचक है।”
शो के प्रसिद्ध डायलॉग का जिक्र करते हुए खन्ना बोले, “बचपन की यादें दिलाने वाले व्यंजन ही सच्चे होते हैं।” ये भावनात्मक बंधन ही खाने को नई ऊंचाइयों तक ले जाते हैं। विकास की प्रक्रिया समाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक मेल, व्यापारिक रुझानों से प्रेरित होती है। खाना हमारी सभ्यता की कहानी कहता है।
अंतरराष्ट्रीय करियर वाले खन्ना ने अमेरिका के जुनून में मिशेलिन सम्मान हासिल किया। मास्टरशेफ जज के अलावा, उनकी पुस्तकें भारतीय क्षेत्रीय व्यंजनों को समर्पित हैं। भोजन राजनय और दान कार्यों में उनकी भूमिका उल्लेखनीय है, जो परंपराओं को आधुनिक माध्यमों से विश्व पटल पर लाती है।
सीजन 9 ने घरेलू शेफ्स की रचनात्मकता को प्रदर्शित किया। खन्ना के अनुसार, खाने का भविष्य बदलाव में है, जो विरासत को मजबूत रखे।