महिला दिवस पर विज्ञान भवन के ‘भारती: नारी से नारायणी’ सम्मेलन में दूसरे दिन विशेषज्ञों ने महिलाओं के विकास पर विमर्श किया। राकेश सिन्हा, डॉ. संध्या पुरेचा और डॉ. एस. महेश ने मंच साझा किया।
सिन्हा ने ऐतिहासिक प्रगति पर प्रकाश डाला—1921 में शिशु विधवाओं के आंकड़े चौंकाने वाले थे। ‘अब पीढ़ी तार्किक बनी है। लड़कियों को आत्मरक्षा के साथ तर्कशक्ति सिखानी होगी।’
डॉ. पुरेचा बोलीं, ‘महिलाएं समाज, कला और अच्छाई की पूर्णता हैं—’नारी तुम नारायणी हो’। कला से भावनाओं को झलकाएं, आने वाली पीढ़ी संस्कृति का आदर सीखे।’
डॉ. महेश ने कहा, ‘देवताओं के अस्त्र योद्धा भाव दर्शाते हैं। आधुनिक नारी की शक्ति भय में खो गई। युद्धरत रानियों की तरह जागृत करें।’
सम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया—महिलाओं को बहुआयामी सशक्तिकरण की दिशा में ले जाना जरूरी।